आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा – Kal Ka Mausam Kaisa Rahega

आज के इस युग मे आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा, इसका पूर्वांनुमान होना अतिआवश्यक हैं। क्योंकि आजकल मौसम का कुछ पता ही नई होता है कब बारिश कब धूप कब गर्मी!

कई बार ऐसा भी होता है कि लोग किसी कार्य करने के लिए या कही घूमने या किसी अन्य प्रयोजन की सम्पूर्ण तैयारी कर बैठ जाते हैं। बिना यह जाने की कल का मौसम कैसा रहेगा। अगर मौसम की जानकारी देख लेते तो, अगले दिन मौसम की खराबी की वजह से उनके कार्य में बाधा नहीं आती। अत्यधिक मौसम की खराबी के कारण वर्षा बिना संकेत दिए हो जाती है। जैसा आप जानते ही है की बरसात और ठंड के मौसम में कई घटनाएं हो जाती है। वो भी मौसम कि खराबी कि वजह से जेसे वर्षा के मौसम में ज्यादा पानी भर जाना या ठंड में कोहरे की वजह से रोड़ हादसे । इसलिए हमें आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा इसका पूर्वांनुमान होना अतिआवश्यक हैं

तो इसलिए लोगो को अपने आने वाले कार्यों को सकुशल रूप से निरंतर जारी रखने कि लिए मौसम का पूर्वांनुमान होना अतिआवश्यक हैं।

आज के इस आधुनिक युग मे तो ऐसे कही विकल्प हैं, जिनके द्वारा आप कल का मौसम कैसा रहेगा, इसका पूर्वांनुमान लगा सकते है। परन्तु सोचने वाली बात यह है कि आज से कई वर्षो सदियों पहले  लोग मौसम का पूर्वांनुमान कैसे लगाते होंगे!

पूर्वांनुमान की तकनीके

आजकल के इस आधुनिक तकनिकी युग मे ऐसी बहुत सी तकनीक है। जिनसे हम आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा, इसका पूर्वांनुमान लगाया जा सकता हैं। और इनकी वजह से कई दिनों, महीनों का पूर्वनुमान भी लगाया जा सकता है की कल का मौसम कैसा रहेगा। जिसमे गूगल, सफारी, ओपेरा फायर फॉक्स के अलावा भी विभिन्न प्रकार की तकनिकी सुविधाएं है। जिनके द्वारा हम आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा इसकी पूरी जानकारी रख सकते हैं। साधारण भाषा में कहें तो हम मौसम का पूर्वांनुमान लगा सकते है।

आज के इस तकनीकी युग मे इंटरनेट सबसे बड़ा स्रोत हैं और इंटरनेट पर कई सारी ऐसी वेबसाइट या ऐप उपलब्ध हैं। जिनके द्वारा हम तुरंत ही सेकंडो मे आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा इसके बारे में पता लगा सकते है। ये सब तकनीके हमारे क्षेत्र या किसी विशिष्ट स्थान के लिए मौसम संबंधी अनेको जानकारी उपलब्ध कराते हैं। यदि आप अपने क्षेत्र के मौसम पर एक त्वरित प्राप्त करना चाहते हैं, तो गूगल में मौसम लिखें या बोल भी सकते हैं और खोज करें। गूगल से आपको सारे परिनाम निकल के आपके फ़ोन या कंप्यूटर कि स्क्रीन पर आ जाएंगे.

इन दिनों राजस्थान के मौसम की वजह से कुछ दिनों से काफ़ी गर्मी हैं। उस से भी कुछ दिनों पहले काफ़ी बारिश हुई थी। कई इलाकों को तो बाढ़ तक का सामना करना पड़ा। शायद उन जगहों पर मौसम का पूर्वांनुमान लगाने की तकनीकी के बारे में लोगो को पता ना हो। इसलिए वहा की आम जनता को कई दिनों तक काफ़ी तकलीफो का सामना करना पड़ा। कई लोगो की जाने भी गई और लोगो के घर बर्बाद हो गए। इसलिए मैं कहता हु की आजकल के इस युग मे आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा, इसकी जानकारी अवश्य होनी चाइए। जिससे आगे आने वाली आपदा या अन्य कोई दुर्घटना को टाला जा सके।

अब फिर से मौसम का रुख कुछ ऐसा ही है तो जिन गाँव कस्बे जिलों या राज्यों मे मौसम की खराबी की वजह से जान मान को हानि होती हैं। तो हर जगह के मौसम का आज के युग की तकनीकी से पूर्वांनुमान लगा के वहा के लोगो की बेहतर से बेहतर सुविधा का इंतजाम किया जा सकता है

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पूर्वांनुमान के लाभ

अगर हम जान ले की आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा तो इसके पूर्वांनुमान से अनेको फायदे हो सकते है। दिल्ली भारत की राजधानी हैं तो दिल्ली के मौसम का पूर्वांनुमान होना अतिआवश्यक हैं। मौसम का पूर्वांनुमान होने से दिल्ली मे कई सारे ऐसे कार्य है, जिनका होना आतिअावश्य होता है। जैसे कि संसद सत्र होना अतिआवश्यक होता हैं। जहा कई निर्णय लिए जाते है जो के पुरे देश के लिए बहुत ही जरूरी निर्णय होते हैं। इसलिए सभी सांसदों को यह जरूर पता होना चाइए की आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा। उसका भी पूर्वांनुमान लगा के अपनी सुविधा के हिसाब से संसद सत्र मे अपनी हिस्सेदारी सुचारु रूप से दे सके!

अब उदाहरण के लिए हम दिल्ली के कल के मौसम कि जानकारी ले तो। हम पाते हैं कि दिल्ली के मौसम विभाग बताते है कि दिल्ली में कल के दिन तेज बारिश की संभावना है। इस दौरान तेज हवाएं चलेंगी। अगले 24 घंटे में दिल्ली में अधिकतम तापमान 37 व न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।

तो इस से आम जन अपने सभी आवश्यक कार्यों को आज मे ही करने कि कोशिश करेंगे तथा आने वाले कल पर बहुत काम ही निर्भर करेगी। इसी प्रकार राजस्थान में कल मौसम कैसा रहेगा का पता लगाया जाए तो अगले कुछ दिनों तेज हवाओ के साथ आंधी-पानी, धुंधला, उच्च 31, हवाएं उ.पू. की और 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटा चलेगी। कुछ इस तरह का मौसम जयपुर मे रहेगा। आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा यह तो पता चल गया और इसकी वजह से कुछ दिन आम आदमी सावधानी बरत सकता है।

कुछ इसी प्रकार अन्य कई राज्यों का आने वाले कल का मौसम कैसा रहेगा? जैसे कि उत्तरप्रदेश प्रदेश कि अगले कुछ दिनों का मौसम छिटपुट गरज के साथ आंधी-पानी। धुंधला। निम्न 26। हवाएं ददपू और परिवर्ती। बारिश की संभावना 30%।

इसी प्रकार मध्य प्रदेश के मौसम के मिजाज का पूर्वांनुमान छिटपुट गरज के साथ आंधी-पानी, निम्न 22, ददप हवाएं 10 से 15 किलोमीटर प्रति घंटाकि रफ़्तार से बढ़कर 15 से 30 किलोमीटर प्रति घंटा कि रफ़्तार होती हुई। और कई ऐसे राज्य भी है अचानक मौसम का मिजाज बदलने से जान मान को कफ हानि होती है। तो ऐसे मे मौसम पूर्वांनुमान लगा के तथा आधुनिक तकनिकीयों का उपयोग करके वहा कि आम जनता को आने वाले संकट से बचाया जा सके। उन्हें कल मौसम कैसा रहेगा इसके बारे मे सचेत कर सकते है, ताकि वो मौसम के खराब रहने तक अपने दैनिक जीवन कि संस्कृयाओं को अपनी हिसाब से संभाल सके।

कल मौसम कैसा रहेगा इसका पूर्वांनुमान होने से कुछ लाभ यह भी के कही जगह होने वाली बिशाल प्रकृतिक आपदाओ कप भी टाला जा सकता हैं। इसी प्रकार पुरे देश तथा पूरे विश्व का कल मौसम कैसा रहेगा, इसका मिजाज का पूर्वांनुमान लगाया जा सकता हैं और सावधानीया बर्ती जा सकती हैं।

मौसम के पूर्वांनुमान का इतिहास

आज के इस तकनिकी युग मे ये सारी जानकारियां आज इतनी आसानी से हम एकत्रित कर लेते है ये सब कल मौसम कैसा रहेगा का भी पता लगा सकती है। जो विज्ञानं का ही कमाल है की आज हम घर बैठे बैठे तुरंत आगे के कई दिनों हफ्तों तथा महीनों के मौसम कि जानकारी ले सकते है। परन्तु आज से कई सालों व युगो तथा सदियों पहले ज़ब सब इतना आधुनिक  नहीं था और ना ही इतनी तकनीके थी तब लोग कैसे मौसम का पूर्वांनुमान लगाते थे तो आइये मौसम के पूर्वांनुमान के इतिहास के कुछ तथ्य हैं जिनका अध्यन कुछ इस प्रकार हैं।

मौसम विज्ञानं कई विधाओं को समेटे हुए विज्ञान है जो पुरे वायुमंडल  का अध्ययन करता है।

मौसम विज्ञान के अध्ययन में पृथ्वी के वायुमण्डल मे कुछ चरों का प्रेक्षण बहुत महत्व रखता है; ये चर हैं – ताप , हवा का दाब , जल वाष्प आदि। इन चरों का मान व इनके परिवर्तन की दर बहुत हद तक मौसम का निर्धारण करते है मौसम विज्ञान में मौसम का पूर्वांनुमान तथा उसकी प्रक्रिया मौसम केंद्र बिंदु पर निर्भर करते हैं मौसम विज्ञान का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है किन्तु अट्ठारहवीं शती तक इसमें खास प्रगति नहीं हो सकी थी और कुछ काश परिवर्तन भी नई था परन्तु इसके तुरंत पश्चात उन्नीसवीं शती में विभिन्न देशों में मौसम के आकड़ों के प्रेक्षण से इसमें गति आयी। बीसवीं शती (जो कि आज कि सदी से ठीक पहले का समय था )के उत्तरार्ध में मौसम की भविष्यवाणी के लिये कंप्यूटर  के इस्तेमाल से इस क्षेत्र में क्रान्ति आ गयी। तथा मौसम विज्ञान ने अनेको नई खोजे कि तथा अनेको नई गुथियॉ को सुलझाया और मौसम विज्ञानं को एक अलग ही सीमा पर पहुंचाया।

पुरातत्वकाल से ही मनुष्य ऋतु तथा जलवायु की अनेक घटनाओं से प्रभावित होता रहा है। वायुविज्ञान का सबसे प्राचीनतम ग्रन्थ का नाम ऐरिस्टॉटल हैं जो कि (384-322 ई.पू.) ‘मीटिअरोलॉजिका’ द्वारा रचित हैं तथा उन्ही के कुछ शिष्य हुए जिन्होने पवन तथा ऋतु संबंधी लीची रचनाएँ दी है

ऐरिस्टॉटल के बाद मौसम विज्ञानं न कुछ ज्यादा प्रगति नहीं कि उन्होंने जो सिद्धांत दिए लोगो न उन्ही सिद्धांतो पे काम कीया तक़रीबन 2000 सालो तक मौसम विज्ञान मे ज्यादा कुछ बदलाव नई आया! उसके बाद 17वी तथा 18वी शताब्दी मे मौसम विज्ञान मे थोड़ा बहुत बदलाव देखने को मिला और वो बदलाव भी इसलिए देखने को मिला क्यों कि ज़ब तक  यन्त्र प्रयोग तथा गैस आदि के नियम स्थापित किये जा चुके थे।

इसी युग मे तापमापी का भी अविष्कार हुआ जो कि सर गेलिलोयों गेलीली ने सन 1607 मे कीया था और इसके बाद सन 1643 मे वायुदाब मापी यन्त्र का अविष्कार सर सरएवेंजीलिस्टा टॉरीसेली  ने कीया था। इन अविष्कारो के पश्चात एक अविष्कार और हुआ जिसे वायल नाम दिया गया जो कि सन 1659 मे हुआ। इन सबके बाद आये जार्ज हैडले जिन्होंने सन 1735 मे ट्रेंड विंड का सिद्धांत दिया इस सिद्धांत के अनुसार इन्होने ट्रेड विंड यानि व्यापारिक हवा के ऊपर व्याख्या की तथा उसमें सबसे पहले वायुमंडलीय पवनों पर पृथ्वी के चक्कर के प्रभाव को सम्मिलित किया।

इसके बाद  वायुमंडल की विभिन्न वास्तविक प्रगतियों से अवगत कराने के लिए सर एंटोनी लेवोसिये ने सन 1783 मे बताया कि मौसम विज्ञानं वायुमंडल मे कैसे काम करता हैं। और सन्‌ 1800 में जॉन डॉल्टन ने वायुमंडल मे हो रहे जलवाष्प के परिवर्तन तथा वायुमंडलीय संघनन पर प्रकाश डाला इसके बाद ही आधुनिक मौसम विज्ञान का आधार स्थापित हो गया।

इसके बाद 19 वी सादी मे  अधिकतम विकाश मौसम विज्ञान के क्षेत्र मे हुआ अनेको देशो मे मौसम विज्ञान की विश्वविद्यालय खोले गए  तथा इसी युग मे मौसम पूर्वांनुमान लगाने की दिशा मे भी पूर्ण विकाश  हुआ । 20 वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में 20 किलोमीटर की ऊँचाई तक वायु के वेग तथा दिशा आदि के प्रेक्षणों के बढ़ जाने के कारण जो सूचनाएँ मौसमविशेषज्ञों को प्राप्त होने लगीं उनसे मौसमविज्ञान की अधिक उन्नति हुई। ऊपरी वायु के ऐसे प्रेक्षणों से मौसमविज्ञान की अनेक समस्याओं को समझने में बहुत अधिक सहायता मिली।

तथा 20वी सदी मे कंप्यूटर के आने से मौसम विज्ञानं मे काफ़ी परिवर्तन आया और मौसम के बारे मे अधिक अच्छे से तथा गहराई मे मौसम का मिजाज जान सकते थे उसके बाद इंटरनेट जगत आया इंटरनेट जगत न मौसम विज्ञानं कि पूरी रूप रेखा को ही बदल के रख दिया हर चीज काफ़ी आसान हो गई उसी प्रकार मौसम जगत मे भी कफ हद तक बदलाव आए और आधुनिक तकनीके आई जिन से मौसम का पूर्वांनुमान काफ़ी हद तक लगाया जा सकता हैं।

आने वाले कल का मौसम केसा रहेगा?

आम तोर पर देखा जाए तो आने वाले कल के मौसम को जान न कि ज़िज्ञासा हर किसी को होती है वो तो सुकर है हम इंटरनेट गूगल के जमाने मे जी रहे हैं फ़ोन निकालो गूगल पे डालो और आने वाले कल के मौसम का मिजाज जान लो लेकिन आमतौर पर देखा जाए तो ये मौसम का मिजाज केवल बारिश के मौसम मे ही देखा जाता है क्यों बाकि और मौसाम शर्दी, गर्मी मे इंसान अपना काम किसी ना किसी प्रकार से कर ही लेता है लेकिन बारिश का वो मौसम हैं जिसमे या तो बारिश कि वजह से लोगो के काम रुकते या लोग इस मौसम मे कही बाहर घूमने का सोचता है तो वो सब तब ही संभव हैं ज़ब आने वाले कल के मौसम का पता हो और उसकी पूरी तैयारी हो और कोई कार्य ज़ब संभव हैं जब बाहर जा सके तो बारिश का एक ऐसा मौसम हैं जिसमे आने वाले कल के मौसम का पूर्वनुमान होना जरूरी हैं

आम तोर प देखा जाए तो आज हम आने वाले कल के मौसम का पूर्वांनुमान अपने फोन इत्यादि द्वारा तुरंत जान लेते है लेकिन एक समय वो भी था ज़ब इंन्सान हवाओ के रुख से तथा पानी के बहाव से सूरज कि किरणों से एवं चाँद कि चांदनी से लगाया करते थे

आज के इस तकनिकी के युग मे इन्सान को आने वाले मौसम का हाल प्रकति से नहीं गूगल से पता चलता है तो उन्ही गूगल के हिसाब से देखा जाए तो देश कि राजधानी दिल्ली मे आने वाले कुछ दिनो बादल छाए हुए रहेंगे और कई जगह उत्तम नगर, द्वारका, नजफगढ़ इन इलाकों मे आधी कि तथा गरज के सात हलकी  बारिश कि भी सम्भावना है ये दिल्ली के आने वाले कुछ दिनों के मौसम का हाल रहेगा।

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